महाराष्ट्र की महायुति सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना, ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के आवंटन में 9,500 करोड़ रुपये की कटौती कर दी है। इस फैसले से उन लाखों महिलाओं को झटका लगा है जो मासिक राशि में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रही थीं।
बजट में कटौती: आंकड़ों का गणित
सरकार ने नए बजट में योजना के लिए 26,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष (2025-26) में यह राशि 36,000 करोड़ रुपये थी। बजट में आई इस कमी का सीधा असर लाभार्थियों की संख्या और मिलने वाली राशि पर पड़ सकता है।
बजट का विभाजन (26,500 करोड़ रुपये):
- सामान्य श्रेणी: 21,000 करोड़ रुपये
- अनुसूचित जाति (SC): 3,000 करोड़ रुपये
- जनजातीय क्षेत्र (ST): 2,500 करोड़ रुपये
क्या मासिक राशि 2,100 रुपये होगी?
चुनाव के दौरान और उसके बाद भी यह चर्चा जोरों पर थी कि लाडकी बहिन योजना की राशि 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,100 रुपये की जाएगी। लेकिन वर्तमान बजट आवंटन को देखते हुए ऐसा होना मुश्किल लग रहा है।
- यदि 1.53 करोड़ लाभार्थियों को केवल 1,500 रुपये भी दिए जाएं, तो सालाना खर्च लगभग 27,540 करोड़ रुपये आता है।
- सरकार का वर्तमान आवंटन (26,500 करोड़) इस खर्च से भी कम है, जिससे राशि बढ़ने की संभावना फिलहाल धूमिल नजर आ रही है।
लाभार्थियों की संख्या में गिरावट का कारण
वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने लगभग 1.53 करोड़ महिलाओं को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा है। पहले यह संख्या अधिक थी, लेकिन हाल ही में चलाए गए वेरिफिकेशन (सत्यापन) अभियान के कारण कई अपात्र महिलाओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
योजना की मुख्य शर्तें (पात्रता):
- आयु सीमा: 21 से 65 वर्ष।
- आय सीमा: परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।
- शुरुआत: जुलाई 2024।
महिलाओं की उम्मीदें और जमीनी हकीकत
महाराष्ट्र की महिलाओं को उम्मीद थी कि बजट में उनके लिए आर्थिक मजबूती का नया रास्ता खुलेगा, लेकिन आवंटन में कटौती और राशि न बढ़ने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्ष इसे सरकार की वित्तीय विफलता बता रहा है, जबकि सरकार का तर्क है कि वेरिफिकेशन के बाद अब केवल वास्तविक पात्र महिलाओं को ही लाभ दिया जा रहा है, जिससे बजट का सही उपयोग होगा।