देशभर में बढ़ती महंगाई ने मजदूर वर्ग की परेशानियों को काफी बढ़ा दिया था। रोजमर्रा की जरूरतों जैसे भोजन, मकान किराया, दवाइयां और बच्चों की शिक्षा का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है, जबकि मजदूरी उसी अनुपात में नहीं बढ़ पा रही थी। ऐसे मुश्किल समय में सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला मजदूरों के लिए राहत की सांस लेकर आया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि न्यूनतम मजदूरी में समय-समय पर बढ़ोतरी करना जरूरी है और यह मजदूरों का अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा कि बदलती आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई के दौर में पुरानी मजदूरी दरों पर काम कराना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि सम्मान के साथ जीवन जीना हर नागरिक का अधिकार है और इसके लिए उचित वेतन मिलना आवश्यक है। इस फैसले के बाद सरकार और नियोक्ताओं दोनों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
मजदूर संगठनों में खुशी का माहौल
इस फैसले के बाद देशभर के मजदूर संगठनों और यूनियनों में खुशी की लहर दौड़ गई है। लंबे समय से न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग की जा रही थी, जो अब पूरी होती नजर आ रही है। कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र और राज्य सरकारों को मजदूरी दरों की दोबारा समीक्षा करनी होगी, जिससे मजदूरों को महंगाई के अनुरूप वेतन मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
राज्य सरकारें हुई सक्रिय
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद कई राज्य सरकारें और श्रम विभाग हरकत में आ गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही नई न्यूनतम मजदूरी दरें घोषित की जा सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मजदूरी में लगभग 10% से 25% तक की बढ़ोतरी संभव है। हालांकि, यह बढ़ोतरी अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में जीवनयापन की लागत के अनुसार तय की जाएगी।
मजदूरी बढ़ने से क्या बदलेगा
न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी से मजदूरों की आर्थिक स्थिति में सीधा सुधार देखने को मिलेगा। परिवार पर बढ़ते खर्च का दबाव कम होगा और मजदूर अपने बच्चों की पढ़ाई, इलाज और जरूरी खर्च बेहतर ढंग से कर पाएंगे। इसके साथ ही मजदूरों का आत्मसम्मान और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
किन-किन मजदूरों को होगा फायदा
इस फैसले का लाभ लगभग सभी क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों को मिलेगा। इसमें निर्माण मजदूर, फैक्ट्री कर्मचारी, होटल और ढाबों में काम करने वाले श्रमिक, घरेलू कामगार, दुकान कर्मचारी और कृषि मजदूर शामिल हैं। खासतौर पर असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए यह फैसला बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।
असंगठित क्षेत्र के लिए नई उम्मीद
अब तक असंगठित क्षेत्र के मजदूर सबसे ज्यादा शोषण का शिकार होते थे। उन्हें कम मजदूरी में अधिक काम करना पड़ता था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य सरकारों की जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वे नई मजदूरी दरों को सख्ती से लागू कराएं और मजदूरों को उनका हक दिलाएं।
नियोक्ताओं को करना होगा नियमों का पालन
नई न्यूनतम मजदूरी लागू होने के बाद यदि कोई नियोक्ता मजदूर को तय वेतन से कम भुगतान करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इससे मजदूरों के शोषण पर रोक लगेगी और कार्यस्थलों पर संतुलन बना रहेगा।
आगे क्या उम्मीद की जा रही है
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला मजदूरों के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में एक मजबूत कदम है। यदि भविष्य में मजदूरी की नियमित समीक्षा होती रही, तो मजदूर वर्ग को महंगाई से लड़ने में काफी मदद मिलेगी और देश की आर्थिक व सामाजिक स्थिति भी मजबूत होगी।